शुक्रवार, 23 नवंबर 2018

चन्द माहिया : क़िस्त 56

चन्द माहिया : क़िस्त 56

1
जब जब घिरते बादल
प्यासी धरती क्यों
होने लगती पागल ?

:2:
भूले से कभी आते
मेरी दुनिया में
रिश्ता तो निभा जाते

:3:
कुछ मन की उलझन है
धुँधला है जब तक
यह मन का दरपन है

:4:
जब छोड़ के जाना था
क्यों आए थे तुम?
क्या दिल बहलाना था?

:5:
लगनी होती ,लगती
आग मुहब्बत की
ताउम्र नही बुझती


-आनन्द.पाठक-


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