सोमवार, 30 जुलाई 2018

चन्द माहिया : क़िस्त 50

चन्द माहिया : क़िस्त 50

1

पल जो भी गुज़र जाता
छोड़ के कुछ यादें
फिर लौट के कब आता ?

2
होता भी अयाँ कैसे
दिल तो ज़ख़्मी है
कहती भी ज़ुबाँ कैसे ?

3
 तुम ने मुँह फेरा है
टूट गए सपने
दिन में ही अँधेरा है

4
शोलों को भड़काना
ये भी सज़ा कैसी
भड़का के चले जाना

5
इक नन्हीं सी चिड़िया
खेल रही जैसे
मेरे आँगन गुड़िया


-आनन्द.पाठक-

शनिवार, 21 जुलाई 2018

चन्द माहिया : क़िस्त 49

चन्द माहिया : क़िस्त 48

:1:
ये इश्क़ है जान-ए-जां
तुम ने क्या समझा
ये राह बड़ी आसां ?

:2:
ख़ामोश निगाहें भी
कहती रहती हैं
कुछ मन की व्यथायें भी

:3:
कुछ ग़म की सौगातें
जब से गए हो तुम
आँखों में कटी रातें


:4:
वो जाने  किधर रहता
एक वही तो है
जो सब की खबर रखता

:5:
माया को सच माना
मद में है प्राणी
 है कितना अनजाना

-आनन्द.पाठक-