शुक्रवार, 25 मई 2018

चन्द माहिया : क़िस्त 44


          :1:
खुद तूने बनाया है
अपना ये पिंजरा
ख़ुद क़ैद में आया है

:2:
किस बात का है रोना
छूट ही जाना है
क्या पाना,क्या खोना ?

          :3:
जब चाँद नहीं उतरा
खिड़की मे,तो फिर
किसका चेहरा उभरा

          :4:
जब तुमने पुकारा है
कौन यहां ठहरा
लौटा न दुबारा है

          :5:
हर साँस अमानत है
जितनी भी उतनी
उसकी ही इनायत है


-आनन्द.पाठक-

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