शनिवार, 23 मई 2015

एक ग़ज़ल : जादू है तो उरतेगा ही...

जादू है तो , उतरेगा ही
सच बोलूँगा, अखरेगा ही

दिल में ख़ुदगरज़ी का आलम
कुनबा है तो बिखरेगा ही

अच्छे दिन जब फ़ानी थे तो
दौर-ए-ग़म भी गुज़रेगा ही

दरपन में जब वो आ जायें
सूना मन फिर सँवरेगा  ही

भटका है जो राह-ए-हक़ से
वक़्त आने पर मुकरेगा ही

होगा दिल जब उस का रौशन
फ़ित्नागर है ,सुधरेगा ही

साया हूँ उनका ही ’आनन’
रंग-ए-दिल कुछ उभरेगा ही

-आनन्द.पाठक-
09413395592

शब्दार्थ
फ़ानी   = ख़त्म होने वाला
दौर-ए-ग़म = मुसीबत के दिन
राह-ए-हक़ = सच्चाई के मार्ग से
फ़ित्नागर          = दहशतगर्द /उपद्रवी

1 टिप्पणी:

Dev K Jha ने कहा…

आज की ब्लॉग बुलेटिन बी पॉज़िटिव, यार - ब्लॉग बुलेटिन मे आपकी पोस्ट को भी शामिल किया गया है ...
सादर आभार !