शुक्रवार, 27 फ़रवरी 2015

चन्द माहिया : क़िस्त 16




:1:
किस बात का हंगामा
ज़ेर-ए-नज़र तेरी
मेरा है अमलनामा

:2:
जो चाहे सज़ा दे दो
उफ़ न करेंगे हम
पर अपना पता दे दो

:3:
वो जितनी जफ़ा करते
क्या जाने हैं वो
हम उतनी वफ़ा करते

:4:

क़तरा-ए-समन्दर हूँ
जितना हूँ बाहर
उतना ही अन्दर हूँ

:5:
इज़हार-ए-मुहब्बत है
रुसवा क्या होना
बस एक अक़ीदत है


[शब्दार्थ ज़ेर-ए-नज़र = नज़रों के सामने
अमलनामा =कर्मों का हिसाब-किताब

-आनन्द.पाठक
09413395592

4 टिप्‍पणियां:

कहकशां खान ने कहा…

बेहद उम्‍दा रचना।

आनन्द पाठक ने कहा…

जी आप का बहुत बहुत शुक्रिया
बा अदब
-आनन्द.पाठक

Govt Jobs ने कहा…

Nice Article sir, Keep Going on... I am really impressed by read this. Thanks for sharing with us. Bank Jobs.

Veena Srivastava ने कहा…

आनंद जी मेरा ब्लॉग नहीं खुल रहा. खुलता है लेकिन
http://neocounter.neoworx-blog-tools.net/
ये आ जाता है. क्या आप कुछ बता सकते हैं...
veena.rajshiv@gmail.com