रविवार, 16 मार्च 2014

डा0 आरिफ़ हसन ख़ान : एक संक्षिप्त परिचय

मित्रो !

अपने पिछले पोस्ट में "उर्दू शायरी में माहिया निगारी" पर एक मज़्मून लिखा था जिसे काफी सराहा गया ।साथ में  यह भी कहा था कि आइन्दा पोस्ट में डा0 आरिफ़ हसन खान साहब की किताब " ख़्वाबों की किरचें’ [माहिया मज़्मूआ’]  से उनकी तख़लीक [रचना] माहिया इस ब्लाग पर सिलसिलेवार लगाऊँगा । यह किताब उर्दू में लिखी हुई है जिसका मैने हिन्दी में नक़्ल-ए-तहरीर [transliteration] कर दिया है जिससे हमारे हिन्दीदाँ दोस्त डा0 साहब के इस फ़न-ए-शायरी से मुतर्रिफ़ [परिचित] हो सकें
             साथ में यह भी लिखा था कि ये सिलसिला शुरू करने के पहले ,डा0 साहब का मुख़्तसर त’आर्रुफ़ [संक्षिप्त परिचय] लगाऊँगा जिससे उनके अदबी हैसियत [साहित्यिक प्रतिभा] से हम आप सब वाक़िफ़ हो सकें
  चुनांचे ,पेश है
डा0 आरिफ़ हसन खां : एक परिचय

यूँ तो डा0 आरिफ़ हसन खां किसी परिचय के मुहताज नहीं है । उर्दू अदब में एक जाना पहचाना नाम .एक मुस्तनद अरूज़ी एक नामचीन शायर हैं। आप ने उर्दू ज़ुबान की ख़िदमत करते हुए अनेक किताबें लिखीं मज़ामीन [लेख] लिखे हैं। उर्दू अदब में आप को 36 साल का अनुभव है । इस ब्लाग के पाठकों के लिए उनका एक मुख़्तसर तआर्रुफ़ [संक्षिप्त परिचय] लगा रहा हूँ जिससे उनके व्यक्तित्व को और अदबी हैसियत को समझने में आसानी होगी
आप का पूरा नाम आरिफ़ हसन खां है ,तखल्लुस ’आरिफ़’ है । आप की पैदाईश की तारीख यूँ तो रिकार्ड में 02-07-1951 दर्ज है [ दर हक़ीक़त 20-11-1951 है] और ग्राम रायपुर ,तहसील क़ायमगंज ज़िला फ़र्रुखाबाद [उ0प्र0] है। आप ने B.Sc-[आनर्स] कमेस्ट्री से किया ।बाद आप ने MA(Urdu) & PhD अलीगढ़ विश्वविद्यालय से किया। आप वर्तमान में हिन्दू कालेज मुरादाबाद[उ0प्र0] में असोसिएट प्रोफ़ेसर और विभागाध्यक्ष हैं
आप ने अपना रिसर्च ’कलाम-ए-मीर का फ़नी मुतालअ [मीर के कलाम का एक साहित्यिक अध्ययन] पर किया था और अब बहुत से शोध विद्द्यार्थियों आप के दिशा निर्देशन में अपना रिसर्च कर रहे हैं।
आप ने अब तक अनेक किताबें लिखीं है जिसमें से मुख्यत: निम्न हैं
1 मेराज़-उल-अरूज़ [2nd Edition ] [1st Edition in 2000] 2013
2 नवा-ए-फ़रोज़ां 2011
3 कुछ नज़्में कुछ ग़ज़लें 2011
4 तल्खीस-ए-बह्र-उल-फ़साहत 2008
5 म’अरूज़ात-ए-अरूज़-ओ-क़ाफ़िया 2004
6 ख़्वाबों की किरचें 2000
7 औराक़-उल- अरूज़ [ डा0 साबिर सम्भली के साथ] 1994
8 आसान-इल्म-ए-बयान[ 5 editions] 1988 -से लेकर 2007 तक
9 मुन्तखब सनाए बदाए’ [ 5 editions] 1988- से लेकर 2007 तक
10 मता’-ए-ग़म 1986
इस के अलावा डा0 साहब ने बहुत से आलेख लिखे जो विभिन्न स्तरीय [मयारी]पत्र-पत्रिकाओं [रिसाईल] में प्रकाशित हुए है और साथ ही आप ने कई अदबी किताबों की समीक्षायें और आलोचनायें भी लिखीं हैं कई seminars  में और अनेक मंचों पर अपने आलेख भी पढ़े हैं
आप को उर्दू साहित्य की खिदमत के लिए और कई मयारी किताबोंकी तख्लीक़ [रचना] के लिए समय समय पर प्रतिष्ठित सरकारी ,ग़ैर सरकारी संस्थानों से पुरस्कारों से नवाज़ा गया है और सम्मानित किया गया है \ सब की फ़ेहरिस्त लगाना यहाँ मुनासिब न होगा।

डा0 साहब ने अपनी एक किताब ’ख़्वाबों की किरचें’[ उर्दू में -माहिया संग्रह ] की एक प्रति बड़ी मुहब्बत से इस हक़ीर राकिम उस्सतूर को भेंट के तौर पेश की है जिसका मैने हिन्दी लिप्यन्तरण [Hindi Transliteration]  कर दिया है । इस किताब के माहिये इस ब्लोग पर सिलसिलेवार लगाता चलूंगा जिससे हमारे अहबाब-ए-हिन्दी को उर्दू शायरी की सरगरमियों का पता चलता रहे और मयारी माहिया निगारी [स्तरीय माहिया लेखन] से भी वाक़िफ़ हों और लुत्फ़ अन्दोज़ हों ।

सादर
-आनन्द.पाठक
09413395592

[नोट : अगले क़िस्त में ख़्वाबों की किरचें से माहिया का क़िस्तवार सिलसिला शुरू करेंगे]





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