शनिवार, 16 जनवरी 2010

जनाब 'सरवर' की गज़लें : ग़ज़ल 07

ग़ज़ल ०७

यूँ अहले-दिल में मेरा इलाही ! शुमार हो
मेरी जबीं पे नक़्श-ए-कफ़-ए-पा-ए यार हो

इतना असर तो तुझ में ग़मे-यादे-यार हो
मैं बे-सुकूँ इधर वो उधर बे-क़रार हो !

शाम-ए-ख़िज़ाँ बा-रंगे-जमाल-ए-बहार हो
गर ज़िन्दगी पे अपनी कोई इख़्तियार हो

दामन है चाक मेरा,गिरेबाँ भी तार-तार
कोई तो हो जो इश्क़ का आईनादार हो !

मैं हूँ ,ख़्याल-ए-यार हो,शाम-ए-उमीद हो
यूँ ख़ातिमा हयात का पायानेकार हो !

अफ़्सोस अब सज़ा के भी का़बिल नही रहा
मेरी तरह ख़ुदा न करे कोई ख़्वार हो !

गुम हूँ मैं इस तरह खु़द अपनी ही जात में
जैसे वह मौज ,बेह्र की जो राज़दार हो !

हुस्ने-ख़ुदी में रंग हो ऐसा कि हमनशीं
आईना जिसको देख के ख़ुद शर्मसार हो !

जैसा कि मेरे साथ राह-ए-दर्द में हुआ
वैसा ही तेरे साथ हो और बार-बार हो !

’सरवर’ दुआ हमारी तिरे हक़ में है यही
ये बज़्म-ए-शे’र तेरे लिए साज़गार हो !

-सरवर-

जबीं पे =माथे पर
कफ़े-पाए =पाँव के तलुवे
बेह्र =समुन्द्र
पायानेकार = आख़िरकार

3 टिप्‍पणियां:

sahespuriya ने कहा…

zindabbad
bahut khoob

PK Swami ने कहा…

aik nihaayat dilkash ghazal inaayat farmaane kaa behad shukriyaa.

Sarwar saheb kee ghazaloN ko bain.ul.aqwaamee satah par maqbooliyat haasil hai aur daur.e haazir ke pukhtaa qalaam shaairoN meiN shumaar rakhte haiN.inko tarannum meiN samaad farmaane kaa lutf apnee hee kashish rakhtaa hai.

apkee mehfil unkee shirkat se raunaq afroz huee hai aur ye maqaam aap ke liye baais.e fakhr.o.taskeen hai.

PK Swami

रज़िया "राज़" ने कहा…

बहोत बढिया। हर शे'र लाजवाब है।